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बैजनाथ ब्लॉक महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनने पर श्रीमती रिचा शर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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लडभड़ोल (मिन्टु शर्मा) हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू जी, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती त्रिप्ता ठाकुर जी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार जी, माननीय विधायक श्री किशोरी लाल जी, राज्यसभा सांसद श्री अनुराग शर्मा जी एवं श्री रविंद्र बिट्टू जी का मैं हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हूँ। मुझे बैजनाथ ब्लॉक महिला कांग्रेस अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान करने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद। मैं विश्वास दिलाती हूँ कि पार्टी द्वारा दी गई इस जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ निर्वहन करते हुए महिला कांग्रेस को मजबूत करने, महिलाओं को संगठन से जोड़ने और जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहूँगी। आप सभी के विश्वास और मार्गदर्शन के लिए पुनः हृदय से आभार। 🙏🌹 — रिचा शर्मा अध्यक्ष, ब्लॉक महिला कांग्रेस बैजनाथ

बाल विवाह करवाने पर विवाह सेवा प्रदाताओं को भी हो सकती है दो साल की सजा-मनीश चौधरी बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह रोकथाम व जागरूकता को लेकर बैठक आयोजित 18 वर्ष से कम आयु की लडक़ी और 21 वर्ष से कम आयु के लडक़े का विवाह कानूनन अमान्य


 जोगिन्दर नगर, 03 मई-एसडीएम जोगिन्दर नगर मनीश चौधरी ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियिम, 2006 के तहत बाल विवाह करवाने पर विवाह सेवा प्रदाताओं जिसमें पंडित, केटरिंग का कार्य करने वाले, टैंट एव डीजे इत्यादि सेवा प्रदाता शामिल हैं को भी दो साल तक का कठोर कारावास या एक लाख रूपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं हो सकती हैं। एसडीएम आज बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह रोकथाम व जागरूकता को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत 18 वर्ष के कम आयु की लडक़ी और 21 वर्ष से कम आयु के लडक़े को नाबालिग माना जाता है और नाबालिगों द्वारा किया गया विवाह गम्भीर और गैर जमानती अपराध है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत नाबालिगों के विवाह अमान्यकरणीय के लिए संबंधित पक्ष के लोग 2 वर्ष की अवधि के भीतर मामला जिला न्यायालय में दायर कर सकते हैं। साथ ही विवाह अमान्य होने पर विवाह के समय दूसरे पक्ष की ओर से प्राप्त उपहारों, गहनों व धनराशि इत्यादि को भी वापिस करना होता है।
मनीश चौधरी ने कहा कि जो कोई व्यक्ति बाल विवाह को बढ़ावा देता है या फिर इसका प्रचार करता है, तो ऐसा व्यक्ति भी बाल विवाह अधिनियम के तहत सजा का हकदार है। जिसके तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास या एक लाख रूपये का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं पर भी बाल विवाह से जुड़ा कोई भी मामला लोगों के ध्यान में आता है तो वे इस संबंध में उनके कार्यालय, सीडीपीओ के कार्यालय या फिर संबंधित क्षेत्र की पुलिस को सूचना उपलब्ध करवा सकते हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस विभाग को ग्रामीण स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला मण्डलों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से समाज के सभी लोगों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के सभी प्रावधानों की जानकारी उपलब्ध करवाने तथा इस संबंध में लोगों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए।
बैठक का संचालन गठित समिति के सदस्य सचिव एवं सीडीपीओ चौंतड़ा बालक राम वर्मा ने किया।
बैठक में सीडीपीओ बीआर वर्मा के अतिरिक्त बीईईओ चौंतड़ा राजू राम, बीईईओ लडभड़ोल कांता देवी, एएसआई राम चंद, पंडित राकेश कुमार सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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