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देशराज ( बाबा) एसएमसी प्रधान बने!

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लडभड़ोल (मिन्टु शर्मा): राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल) पंजालग में स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के चुनावों का सफल आयोजन किया गया। इस चुनाव में देशराज (बाबा) को सर्वसम्मति से समिति का नया प्रधान चुना गया है। उनके चयन पर पूरे स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। ​इस अवसर पर स्कूल के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह ने नवनियुक्त प्रधान देशराज बाबा को बधाई व शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर स्कूल प्रबंधन और स्टाफ के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: ​विजय कुमार (प्रवक्ता/लेक्चरर) ​शमशेर सिंह (प्रवक्ता/लेक्चरर) ​संजय राणा (डीपीई - शारीरिक शिक्षा शिक्षक) ​नोट: सर्वसम्मति से हुआ यह चुनाव यह दर्शाता है कि स्कूल के विकास और बच्चों के भविष्य को लेकर पूरे क्षेत्र और स्कूल प्रशासन में आपसी तालमेल और एकजुटता है।

राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला जोगिन्दर नगर के बेहतर आयोजन को मांगे सुझाव 1-5 अप्रैल तक आयोजित होगा जोगिन्दर नगर का राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला

 


जोगिंदर नगर, 02 मार्च-जोगिन्दर नगर में आगामी 1-5 अप्रैल तक मनाए जाने वाले राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला के बेहतर आयोजन के लिए लोगों से सुझाव आमंत्रित किये हैं। इस राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेला में 150 से अधिक देवी-देवता लोगों को आशीर्वाद देने के लिए जोगिन्दर नगर पहुंचते हैं। चौहार घाटी के प्रमुख देव हुरंग नारायण व देव पशाकोट की अगुवाई में निकलने वाली भव्य शोभायात्रा के साथ मेले के मुख्यातिथि इसका शुभारंभ करते हैं। इस दौरान मनोरंजन के लिए चार सांस्कृतिक संध्याओं का भी आयोजन किया जाता है। इसके अलावा मेले के प्रत्येक दिन विभिन्न तरह की अन्य गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है।

मेला समिति के अध्यक्ष एवं एसडीएम जोगिन्दर नगर कृष्ण कुमार शर्मा ने आगामी मेले के बेहतर व सफल आयोजन के लिए लोगों से सुझाव आमंत्रित किये हैं। ये सुझाव आगामी 10 मार्च तक लिखित या मौखिक तौर पर एसडीएम कार्यालय को प्रस्तुत किये जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त ये सुझाव एसडीएम की ई-मेल  sdmmanjnr@gmail.com  पर भी भेजे जा सकते हैं।
एसडीएम ने कहा कि मेले हमारी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। इस तरह के आयोजनों से जहां हमारी समृद्ध संस्कृति को बल मिलता है तो वहीं लोगों में आपसी मेल मिलाप व भाईचारे की भावना भी सुदृढ़ होती है। ऐसे में मेला आयोजन को नया स्वरूप देने या फिर इसमें नई व्यवस्थाओं को जोड़ने या उनमें सुधार लाने के लिए स्थानीय लोगों से ये सुझाव आमंत्रित किये गए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के आयोजनों का स्थानीय प्रशासन एवं विभिन्न विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सामूहिक भागीदारी से ही बेहतर एवं सफल आयोजन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मेले के दौरान सांस्कृतिक संध्याओं के साथ-साथ अन्य तरह की विभिन्न गतिविधियों के आयोजन में लोग इन्हे प्रायोजित कर मेले में अपनी अहम भागीदारी सुनिश्चित बना सकते हैं। इसके अलावा मेले के दौरान आने वाले देवी-देवताओं के देवलुओं व मेला ड्यूटी में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए लंगर व्यवस्था भी उपलब्ध करवाई जाती है। इसके लिए भी स्थानीय लोग बतौर प्रायोजक अपनी भागीदारी सुनिश्चित बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त मेले के दौरान विभिन्न तरह की गतिविधियों के आयोजन में बतौर प्रायोजक शामिल होने वाले लोगों को भी मेला कमेटी की ओर आमंत्रित किया गया है।
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