BREAKING NEWS:

लडभड़ोल:- आंगनबाड़ी केंद्र जमथला में 'समर मेला कमाल की तैयारी' का शानदार आयोजन, बच्चों और माताओं में दिखा भारी उत्साह

Image
लडभड़ोल( मिंटू शर्मा) (मंडी): आंगनबाड़ी केंद्र जमथला में आज 'समर मेला कमाल की तैयारी' कैंप का बेहद सफल और उत्साहजनक आयोजन किया गया। इस विशेष मेले में पंचायत लडभड़ोल की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कैंप का मुख्य उद्देश्य खेल-खेल में बच्चों के मानसिक व शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देना था। ​7 आकर्षक स्टालों के जरिए दी गई शिक्षा ​इस कैंप में 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के बच्चों और उनकी माताओं ने विशेष रूप से शिरकत की। मेले को बेहद आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाने के लिए 7 अलग-अलग स्टाल लगाए गए थे। इन स्टालों के माध्यम से बच्चों को रटने के बजाय खेल-खेल में और मनोरंजक गतिविधियों के जरिए शिक्षा प्रदान की गई। ​खास बात: खेल और पढ़ाई के इस अनोखे संगम को देखकर बच्चे और उनकी माताएं बेहद उत्साहित नजर आईं। माताओं ने भी गतिविधियों में हिस्सा लेकर बच्चों का हौसला बढ़ाया। ​इन कार्यकर्ताओं ने संभाला मोर्चा ​इस पूरे भव्य कार्यक्रम और कैंप की व्यवस्था को सफल बनाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अहम भूमिका निभाई। कार्यकर्ता अर्चना देवी, रीना देवी, पूनम देवी और शमा शर्मा ने पूरे कार्यभार को बेहद...

लड भडोल क्षेत्र मे धू-धू कर जल रहे हैं जंगल

लड भडोल क्षेत्र में  धू  धू कर जल रहे हैं जंगल। पती धरती करे पुकार बंद करो यह अत्याचार!   धू-धू कर जल रहे जंगल।                        आजकल देखने में आ रहा है कि कुछ लोग अपनी जमीन को साफ करने के लिए तो कुछ शरारती तत्व जंगलों में आग लगा रहे हैं जिससे एक तो पहले ही गर्मी ज्यादा है और इन को जलाने के बाद गर्मी और ज्यादा बढ़ रही है साथ में प्रदूषण भी बढ़ रहा है आजकल बहुत सारे जीव जंतु प्रजनन करते हैं अंडे देते हैं लेकिन आग लगने के कारण उनके अंदर बच्चे नष्ट हो जाते हैं तो एक मानव  होने के नाते हमारा यह काम करना बहुत ही गलत काम है और जंगल में आग लगाने वाले लोगों को शर्म होनी चाहिए और वैसे भी यह एक और गैरकानूनी काम है।               
     
पिछले कल देखने में आया कि सयुन के जंगलों में भी आग लगी हुई थी जाहिर सी बात है यह किसी शरारती तत्व का ही काम है लेकिन इससे जब जंगलों में आग भड़कती है तो बहुत सारे जीव जंतु और पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचता है तो लोगों को अब सोचना चाहिए आज के जमाने में सभी पढ़े लिखे हैं तो इन पढ़े लिखो को अकल होनी पढ़े लिखे गवार को अकल होनी चाहिए पुराने करते थे।     
                                             पुरानी बुजुर्ग भी जंगलों को नष्ट नहीं होने देते थे वह पहले अगर एक पेड़ काटते थे तो उसके बदले में पहले 10 पेड़ लगाते थे और पेड़ों को काटना पाप समझा जाता था लेकिन आजकल जैसे पेड़ों को काटना पेड़ों को जलाना एक फैशन बन गया है  लेकिन आदमी जो है आपने हद को पार कर चुका है जिसके परिणाम हमें देखने को मिल रहा है वह दिन दूर नहीं जब आदमी साफ  हवा के लिए तरस जाएगा इसलिए सब से गुजारिश है कि मानव होने का परिचय दें  और जंगलों को ना जलाएं

Comments