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बैजनाथ ब्लॉक महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बनने पर श्रीमती रिचा शर्मा जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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लडभड़ोल (मिन्टु शर्मा) हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू जी, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती त्रिप्ता ठाकुर जी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार जी, माननीय विधायक श्री किशोरी लाल जी, राज्यसभा सांसद श्री अनुराग शर्मा जी एवं श्री रविंद्र बिट्टू जी का मैं हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करती हूँ। मुझे बैजनाथ ब्लॉक महिला कांग्रेस अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रदान करने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद। मैं विश्वास दिलाती हूँ कि पार्टी द्वारा दी गई इस जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ निर्वहन करते हुए महिला कांग्रेस को मजबूत करने, महिलाओं को संगठन से जोड़ने और जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहूँगी। आप सभी के विश्वास और मार्गदर्शन के लिए पुनः हृदय से आभार। 🙏🌹 — रिचा शर्मा अध्यक्ष, ब्लॉक महिला कांग्रेस बैजनाथ

लड भडोल क्षेत्र मे धू-धू कर जल रहे हैं जंगल

लड भडोल क्षेत्र में  धू  धू कर जल रहे हैं जंगल। पती धरती करे पुकार बंद करो यह अत्याचार!   धू-धू कर जल रहे जंगल।                        आजकल देखने में आ रहा है कि कुछ लोग अपनी जमीन को साफ करने के लिए तो कुछ शरारती तत्व जंगलों में आग लगा रहे हैं जिससे एक तो पहले ही गर्मी ज्यादा है और इन को जलाने के बाद गर्मी और ज्यादा बढ़ रही है साथ में प्रदूषण भी बढ़ रहा है आजकल बहुत सारे जीव जंतु प्रजनन करते हैं अंडे देते हैं लेकिन आग लगने के कारण उनके अंदर बच्चे नष्ट हो जाते हैं तो एक मानव  होने के नाते हमारा यह काम करना बहुत ही गलत काम है और जंगल में आग लगाने वाले लोगों को शर्म होनी चाहिए और वैसे भी यह एक और गैरकानूनी काम है।               
     
पिछले कल देखने में आया कि सयुन के जंगलों में भी आग लगी हुई थी जाहिर सी बात है यह किसी शरारती तत्व का ही काम है लेकिन इससे जब जंगलों में आग भड़कती है तो बहुत सारे जीव जंतु और पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचता है तो लोगों को अब सोचना चाहिए आज के जमाने में सभी पढ़े लिखे हैं तो इन पढ़े लिखो को अकल होनी पढ़े लिखे गवार को अकल होनी चाहिए पुराने करते थे।     
                                             पुरानी बुजुर्ग भी जंगलों को नष्ट नहीं होने देते थे वह पहले अगर एक पेड़ काटते थे तो उसके बदले में पहले 10 पेड़ लगाते थे और पेड़ों को काटना पाप समझा जाता था लेकिन आजकल जैसे पेड़ों को काटना पेड़ों को जलाना एक फैशन बन गया है  लेकिन आदमी जो है आपने हद को पार कर चुका है जिसके परिणाम हमें देखने को मिल रहा है वह दिन दूर नहीं जब आदमी साफ  हवा के लिए तरस जाएगा इसलिए सब से गुजारिश है कि मानव होने का परिचय दें  और जंगलों को ना जलाएं

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