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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भराड़पट में हुआ नई एसएमसी कमेटी का गठन! श्रीमती रेनू बनी प्रधान!

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लडभड़ोल ( मिन्टु शर्मा) आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भराड़पट में नई एसएमसी कमेटी का गठन किया गया जिसमें अभिभावकों और समस्त विद्यालय स्टाफ ने भाग लिया। श्रीमती रेनू को सर्वसम्मति से नई एसएमसी कमेटी का प्रधान चुना गया।इसके अतिरिक्त श्रीमती शिल्पादेवी, श्रीमती लता देवी, श्रीमती सीमा देवी, श्रीमती तारादेवी , श्रीमती ममता को नई कमेटी का मेंबर चुना गया।प्रधानाचार्य श्री राजेश चंद कटोच जी ने नव निर्वाचित एसएमसी कमेटी की प्रधान श्रीमती रेनू देवी को बधाई दी और साथ ही पूर्व एसएमसी कमेटी प्रधान श्रीमती बबली देवी को पिछले 3 वर्षों के दौरान अपना भरपूर सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। 

जय मां मंगरोली की जय हो


                                                                    


 सुणओ पाहडी माणुओ ओ भलेया

चल सैर मंगरोली माता ओ

उच्चेया पहाडां कीर्तन हुन्दा

जोता जगदीयां अन्दरओ

जय हो सिकन्दर धार वाली मंगरोली माता की ।

लिजीए पाठकगण  आज हम आपके समक्ष संक्षिप्त विवरण देने जा रहे हैं माता मंगरोली के धाम का ।

लड भडोल की एक पहाड़ी चोटी को सिकंदर धार कहा जाता है । यहीं पर स्थित है मंगरोली माता का मन्दिर ।यह| एक अत्यन्त रमणीय व शान्त स्थल है । यहाँ से  लड भडोल  तथा कांगड़ा के चढियार क्षेत्र के कुछ स्थल भी  नजर आते है ।                    

दुध गायत्री भी है एक नाम माता मंगरोली का  

स्थानीय लौगो में माता मंगरोली दुध गायत्री माता के नाम से भी प्रसिद्ध है । लोग यहाँ विशेषकर दुधारु पशुओं के स्वास्थ्य हेतु कामना करते है ।इसके  अलावा भी यहाँ जो मन्नत मांगी जाती है  माता उसे पुरा करती है ऐसा स्थानीय लोग मानते है । मंदिर में माता की मूर्ति की पुजा होती है ।किवंदन्ती है कि किसी समय इस पर महान सिंकदर ने चढाई की थी और उसे भी माता मंगरोली के आगे सिर झुकाया था ।               सिकंदर ने करवाया था  विधी विधान से  हवन

माता ने महान सिंकदर के  अहंकार  को भंग किया था । उसने माता के समक्ष घुटने ढेक कर शीश नवाया था । स्वपन में माता ने  उसे हवन कराने तथा  पंडितों को दान दक्षिण देने को कहा । फिर उसने माता की गुफा मे विधी विधान से माता का हवन पुजन किया ।                  

कैसे पड़ा मंगरोली माता नाम

कहते हैं कि सिकंदर ने पंडितों को यहाँ भूमी दान किया था । उन्होंने यहाँ गौशाला बनवाई तथा वर्षो तक माता की अर्चना की । यहाँ गोएं चराई जाती थीं ।मंदिर के पास बांका नामक ग्वाला गाय चराता था । लोग  दुध देने वाली गाय ले जाते थे और जो बांझ होती थी उन्हें यहाँ  चरने छोड़ जाते थे । ऐसे ही दो गाऐं जिनका नाम मंगला और शैली था, वह बाँझ थी । उन्हें बांका ग्वाला चराता था । उसने माता से प्रार्थना की कि ये दोनों गर्भ धारण करके दुध देने लग जाएं यानि सू जाए । माता ने  उसकी पुकार सुनी ओर ये दोनों सू गई । इन्हीं दोनों गोओ के नाम पर माता नाम मंगरोली पड़ा है ।वर्तमान में  इस मन्दिर का रख रखाव मंदिर कमेटी कर रही है ।       मार्गशीर्ष के प्रथम प्रविष्टे को किया जाता है मेले का  आयोजन

सिंकदर ने यहाँ  पर मार्गशीर्ष की सक्रान्ति के दिन पुजन करवाया था ।तभी से यहाँ हर मार्गशीर्ष के प्रथम प्रविष्टे को मेला  आयोजित किया जाता है ।मंदिर कमेटी मंदिर के विकास कार्य करवा रही है ।

विशेष ध्यान दिया जाए तो यहाँ पर दूर दूर से क्ष्रदालुओ पहुंचेगे तथा पयर्टन को भी  बढावा मिल सकता है  ।


हमारा  उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को आहत करना नहीं है  वरना लड भडोल के इलाके के  आसपास के सुन्दर व चमत्कारिक स्थलों  को लोगों के समक्ष सुन्दर तरीके से  प्रस्तुत करना है यू- टयूव पर माता की किसी अनन्य भक्त ने वहुत सुन्दर भजन व वीडियो बनाया है ।आप चाहे तो इस सुन्दर भजन का आनंद ले सकते है ।




|||||||||||| जय माता दी|||||||||||                             

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