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बधाई हो ग्राम पंचायत तुलाह के गांव चुल्ला के टेकचंद शर्मा सेना में बने मेजर।

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लडभड़ोल (मिन्टु शर्मा)गांव चुल्ला के स्वर्गीय बाबू बलीराम शर्मा के पुत्र टेकचंद शर्मा गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय सेना में मेजर बने। वे हाल ही में पिछले वर्ष 2025 स्वतंत्रता दिवस के मौके में कप्तान बने थे। टेकचंद शर्मा पिछले अठाईस वर्षों से भारतीय सेना की जैक लाई रेजिमेंट में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात हैं। इस बीच वे विदेश में यूएन मिशन के तहत साउथ सूडान और इमटराट के तहत भूटान में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। टेकचंद शर्मा जी ने वर्ष 1984 में हाई स्कूल तुलाह से दसवीं, 1989 में धर्मशाला कालेज से ग्रेजुएशन, 1995 में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला से एमए और 1996 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एम फिल की है, जिसमें वे गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। इसके बाद 1997 में वे सेना में डायरेक्ट एंट्री लेकर आरटी जेसीओ के पद पर तैनात हुए। टेकचंट शर्मा इसका श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों व परि जनों को देते हैं। प्रमोशन के इस मौके पर टेकचंद १. जी को बहुत-बहुत बधाई।

ढंडोल (कांगड़ा) गांव का भुणू मंदिर जहां ना जाने पर वहां की लड़कियों को नहीं होती संतान प्राप्ति

ढंडोल (कांगडा)गांव का भूणु मंन्दिर जहां ना जाने पर वहां की लड़कियों को नहीं होती संतान प्राप्ति।      

ढंडोल (कांगड़ा) गांव का भूणु मंन्दिर जहां ना जाने पर वहाँ की लड़कियों को नहीं होती संन्तान प्राप्ति ।

पाठकगण,आज हम आपके समक्ष की अनोखी घटना तथा मंदिर का जिकर करने जा रहे हैं जो  आपको 21वीं सदी में भी हैरान  परेशान कर देगा । कांगड़ा के चढियार क्षेत्र के साथ ढंडोल नामक है । जो कि लड भडोल के जमथला तथा लड भडोल से भी साफ दिखाई देता है । ये एक बहुत सुन्दर स्थान है । इसी गांव की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है भूणू का मन्दिर ।                                              ढंडोल वासियों ने मार डाला था भूणु को ।           

जी हां,ये मंदिर किसी  देवता विशेषका नहीं  एक व्यक्ति भूण का सम्बन्ध लड भडोल के डिबडैऊँ के चौहान वंश से था ।लड भडोल तथा ढंडोल के बीच में बिनवा खडड् है जगह  पर पहले लोग पानी भरने नहाने  इत्यादि के  लिए जाया करते थे

   डिबडैऊ,जम थला तथा ढंडोल के मध्य है । वर्तमान में  इस  जगह पुल का निर्माण हो रह है  ।  इसी स्थान पर नहाने जाया करता था भूणू ।वहाँ पर ढंडोल की कुछ कन्याऐं भी नहाने आया करती थीं ।भूणू भी एक बालक ही था  उन में जान पहचान हो गई थी ।

एक दिन एक  आदमी  ने  अपनी कन्या को नींद  में  बड़ बड़ाते हुए  सुना कि भूणू आया , भूणू आया । वो हैरान हुआ और क्रोधित हो गया कि मेरी  लड़की   ऐसे क्यों बड बड़ा रही है ।कहीं  इसके  भूणू के साथ  अवैध सम्बन्ध तो नहीं  ।उसने यह बात ढंडोल के पुरूषों से कहीं  ओर निगरानी करने लगा कि कब भूणू नहाने  आता  है ।भूणू जैसे ही  नहाने  आया ।ढंडोल वालों ने  उसे ऊपर से पत्थर मारकर उसकी जान ले ली ।

भूणू के मंदिर का निर्माण

उस वक्त लडके लड़कियों का खुलापन आज जितना नहीं था । भूणू मासूम था ।उसका कोई कसूर नहीं था फिर भी  उसे शक के  आधार पर मार डाला गया ।कुछ दिन बाद ही   गांव के  लोगो को रोज अजीब अजीब सपने  आने  लगे  कि तुमने  निर्दोष भूणू  को मारा है ।अब तुम्हें उसका  मंदिर बनवाना होगा और पत्थर के भूणू के रुप में  उसे  पुजना होगा ।अगर तुम्हारी कन्याऐं 

वहाँ पर नहीं जाऐगी तो उनका वंश नहीं बढेगा ।पत्थर की होती है पूजा

फिर गांव के लोगों ने  आपस में विचार विमर्श किया  और पहाड़ की चोटी पर भूणू का मंदिर बनवाया  और एक पत्थर को भूणू के स्वरुप स्थापित किया । इसी पत्थर को भूणू के  रूप में पुजा जाता है ।

वहाँ की किसी कुल विशेष की लड़कियों को वहाँ शादी के बाद जाना होता  है नहीं तो वे मां नहीं बन पाती ।

पत्थर का करना पडता है पूजन 21वीं सदी  में यह हैरानी  से भर देने  वाली बात लगेगी पर यह सत्य है । कन्या विशेष को शादी  के बाद वहाँ जाना होता है ओर  उस भूणू रूपी पत्थर को पूजना होता है ।

ये जानकारी हमे आम जनमानस तथा पुराने बुजुर्गो से मिली है । हम इसे ओर लौगो के सदर्म्म में लाना चाहते है  ।हमारा उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ढेस पहुंचाना नहीं है ।वरना ये  संदेश देना है कि किसी के ऊपर गलत  इंलजाम नहीं लगाना चाहिए ।किसी निर्दोष के साथ गलत होगा तो कुदरत उसे किसी न किसी तरीके से दंडित जरूर करती है ।

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