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जोगिन्दरनगर में प्राकृतिक आपदा की घटना में महिला की मृत्यु !

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दिनांक 24 जुलाई, 2026 को जोगिन्दरनगर क्षेत्र में एक दुःखद प्राकृतिक घटना में सामेश्वरी शर्मा (49 वर्ष), निवासी सुल्तानपुर, जिला कुल्लू की मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह अपने परिवार के साथ माता सिमसा देवी मंदिर जा रही थीं। बाहमणू नाला के समीप वाहन रोकने के बाद वह पानी लेने के लिए नीचे गईं, तभी पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल जोगिन्दरनगर पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जोगिन्दरनगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण कर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह घटना प्राकृतिक आपदा के कारण होना पाई गई है तथा मामले में धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।

ढंडोल (कांगड़ा) गांव का भुणू मंदिर जहां ना जाने पर वहां की लड़कियों को नहीं होती संतान प्राप्ति

ढंडोल (कांगडा)गांव का भूणु मंन्दिर जहां ना जाने पर वहां की लड़कियों को नहीं होती संतान प्राप्ति।      

ढंडोल (कांगड़ा) गांव का भूणु मंन्दिर जहां ना जाने पर वहाँ की लड़कियों को नहीं होती संन्तान प्राप्ति ।

पाठकगण,आज हम आपके समक्ष की अनोखी घटना तथा मंदिर का जिकर करने जा रहे हैं जो  आपको 21वीं सदी में भी हैरान  परेशान कर देगा । कांगड़ा के चढियार क्षेत्र के साथ ढंडोल नामक है । जो कि लड भडोल के जमथला तथा लड भडोल से भी साफ दिखाई देता है । ये एक बहुत सुन्दर स्थान है । इसी गांव की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है भूणू का मन्दिर ।                                              ढंडोल वासियों ने मार डाला था भूणु को ।           

जी हां,ये मंदिर किसी  देवता विशेषका नहीं  एक व्यक्ति भूण का सम्बन्ध लड भडोल के डिबडैऊँ के चौहान वंश से था ।लड भडोल तथा ढंडोल के बीच में बिनवा खडड् है जगह  पर पहले लोग पानी भरने नहाने  इत्यादि के  लिए जाया करते थे

   डिबडैऊ,जम थला तथा ढंडोल के मध्य है । वर्तमान में  इस  जगह पुल का निर्माण हो रह है  ।  इसी स्थान पर नहाने जाया करता था भूणू ।वहाँ पर ढंडोल की कुछ कन्याऐं भी नहाने आया करती थीं ।भूणू भी एक बालक ही था  उन में जान पहचान हो गई थी ।

एक दिन एक  आदमी  ने  अपनी कन्या को नींद  में  बड़ बड़ाते हुए  सुना कि भूणू आया , भूणू आया । वो हैरान हुआ और क्रोधित हो गया कि मेरी  लड़की   ऐसे क्यों बड बड़ा रही है ।कहीं  इसके  भूणू के साथ  अवैध सम्बन्ध तो नहीं  ।उसने यह बात ढंडोल के पुरूषों से कहीं  ओर निगरानी करने लगा कि कब भूणू नहाने  आता  है ।भूणू जैसे ही  नहाने  आया ।ढंडोल वालों ने  उसे ऊपर से पत्थर मारकर उसकी जान ले ली ।

भूणू के मंदिर का निर्माण

उस वक्त लडके लड़कियों का खुलापन आज जितना नहीं था । भूणू मासूम था ।उसका कोई कसूर नहीं था फिर भी  उसे शक के  आधार पर मार डाला गया ।कुछ दिन बाद ही   गांव के  लोगो को रोज अजीब अजीब सपने  आने  लगे  कि तुमने  निर्दोष भूणू  को मारा है ।अब तुम्हें उसका  मंदिर बनवाना होगा और पत्थर के भूणू के रुप में  उसे  पुजना होगा ।अगर तुम्हारी कन्याऐं 

वहाँ पर नहीं जाऐगी तो उनका वंश नहीं बढेगा ।पत्थर की होती है पूजा

फिर गांव के लोगों ने  आपस में विचार विमर्श किया  और पहाड़ की चोटी पर भूणू का मंदिर बनवाया  और एक पत्थर को भूणू के स्वरुप स्थापित किया । इसी पत्थर को भूणू के  रूप में पुजा जाता है ।

वहाँ की किसी कुल विशेष की लड़कियों को वहाँ शादी के बाद जाना होता  है नहीं तो वे मां नहीं बन पाती ।

पत्थर का करना पडता है पूजन 21वीं सदी  में यह हैरानी  से भर देने  वाली बात लगेगी पर यह सत्य है । कन्या विशेष को शादी  के बाद वहाँ जाना होता है ओर  उस भूणू रूपी पत्थर को पूजना होता है ।

ये जानकारी हमे आम जनमानस तथा पुराने बुजुर्गो से मिली है । हम इसे ओर लौगो के सदर्म्म में लाना चाहते है  ।हमारा उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ढेस पहुंचाना नहीं है ।वरना ये  संदेश देना है कि किसी के ऊपर गलत  इंलजाम नहीं लगाना चाहिए ।किसी निर्दोष के साथ गलत होगा तो कुदरत उसे किसी न किसी तरीके से दंडित जरूर करती है ।

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