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देशराज ( बाबा) एसएमसी प्रधान बने!

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लडभड़ोल (मिन्टु शर्मा): राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल) पंजालग में स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) के चुनावों का सफल आयोजन किया गया। इस चुनाव में देशराज (बाबा) को सर्वसम्मति से समिति का नया प्रधान चुना गया है। उनके चयन पर पूरे स्कूल स्टाफ और ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। ​इस अवसर पर स्कूल के प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह ने नवनियुक्त प्रधान देशराज बाबा को बधाई व शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर स्कूल प्रबंधन और स्टाफ के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: ​विजय कुमार (प्रवक्ता/लेक्चरर) ​शमशेर सिंह (प्रवक्ता/लेक्चरर) ​संजय राणा (डीपीई - शारीरिक शिक्षा शिक्षक) ​नोट: सर्वसम्मति से हुआ यह चुनाव यह दर्शाता है कि स्कूल के विकास और बच्चों के भविष्य को लेकर पूरे क्षेत्र और स्कूल प्रशासन में आपसी तालमेल और एकजुटता है।

सेना का हर 10वां वीरता पुरस्कार हिमाचली सपूत को, फिर भी अपनी रेजिमेंट नहीं

सेना का हर 10वां वीरता पुरस्कार हिमाचली सपूत को, फिर भी अपनी रेजिमेंट नहीं
देश के पहले परमवीर चक्र विजेता पालमपुर के मेजर सोमनाथ। कारगिल युद्ध में दो परमवीर चक्र समेत कुल चार सर्वोच्च सैन्य सम्मान। सेना का हर 10वां वीरता पुरस्कार हिमाचली जवान के नाम। थलसेना, वायुसेना और नौसेना में सवा लाख से अधिक जवान दे रहे हैं सेवाएं और करीब इतने ही पूर्व सैनिक देश सेवा कर चुके हैं। लेकिन आजादी के 72 साल बाद भी हिमाचल को अपनी सैन्य रेजिमेंट नहीं मिल पाई है।
चुनावों के समय हिमाचल रेजिमेंट की आवाज तो उठती रही है, लेकिन चुनावी शोर थमते ही यह मांग भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। प्रदेश से हर पांच साल बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों से कुल चार सांसद और छह साल बाद दो राज्यसभा सदस्य संसद में पहुंचते हैं। बावजूद इसके हिमाचल के नाम से रेजिमेंट की मांग अनसुनी रह जाती है। 
देश के कई राज्यों के नाम पर सेना में रेजिमेंट हैं। उत्तराखंड में कुमाऊं और गढ़वाल दो रेजिमेंट है। हरियाणा में भी जाट और राजपूत नाम से सेना की दो रेजिमेंट्स हैं। लेकिन सेना में करीब एक हजार बहादुरी पुरस्कार हासिल करने वाले सैनिकों के राज्य में एक भी आर्मी की रेजिमेंट नहीं है। सूबे के युवकों को डोगरा रेजिमेंट में भर्ती होने के लिए मीलों दूर फैजाबाद भर्ती केंद्र जाना पड़ता है।

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