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जोगिन्दरनगर में प्राकृतिक आपदा की घटना में महिला की मृत्यु !

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दिनांक 24 जुलाई, 2026 को जोगिन्दरनगर क्षेत्र में एक दुःखद प्राकृतिक घटना में सामेश्वरी शर्मा (49 वर्ष), निवासी सुल्तानपुर, जिला कुल्लू की मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह अपने परिवार के साथ माता सिमसा देवी मंदिर जा रही थीं। बाहमणू नाला के समीप वाहन रोकने के बाद वह पानी लेने के लिए नीचे गईं, तभी पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल जोगिन्दरनगर पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जोगिन्दरनगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण कर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह घटना प्राकृतिक आपदा के कारण होना पाई गई है तथा मामले में धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।

लड्ड भडोल क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा निर्जला एकादशी का पर्व। जगह-जगह लगाई जा रही छबीले।

लड्ड भडोल क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा निर्जला एकादशी का पर्व। जगह-जगह  लगाई जा रही छबीले।

  पाठकगण, हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान धडकता है । हर वर्ष 24 एकादशी होती है परंतु जब मल मास या अधिक मास आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। जेठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत  में निर्जल रहकर उपवास किया जाता है। इसलिए इसे  निर्जला एकादशी कहते हैं।   
                                             

 हिंदू धर्म में इस पर्व का है महत्वपूर्ण  स्थान।

हिंदू धर्म इस पर्व का महत्वपूर्ण स्थान है ।जो लोग सभी एकादशी का उपवास नहीं रखते, अगर  केवल निर्जला एकादशी का व्रत रख ले तो उन्हें वर्ष भर की सभी एकादशी के व्रत का पुण्य लाभ मिलता है, ऐसी मान्यता है।                                   निर्जल रहकर किया जाता है व्रत। छबीले लगाकर लोगों को देते है  मीठा पानी और फल।                  इस दिन लोग निर्जल  रहकर उपवास रखते हैं। आज के दिन चावल या चावल से बनी चीजें नहीं खाई जाती। इस दिल तुलसी  दल या बिल पत्री को भी नहीं तोड़ते। कहा जाता है कि पांडव सभी एकादशी का उपवास किया करते थे ,परंतु महाबली  भीम अपने असहनीय भूख से विवश होकर उपवास नहीं कर पाते थे। तब महर्षि व्यास में जी ने उन्हें निर्जला एकादशी का एकमात्र उपवास करने को कहा था। तभी से इस एकादशी का नाम भीमसेनी और पांडव एकादशी भी पड़ा।   धूमधाम से मनाते हैं निर्जला एकादशी पर्व लड भडोल क्षेत्र के लोग ।

 आज लड भडोल में चंदन हिमाचली ,आदित्य उपाध्याय, आशीष शर्मा, शिवम ,प्रीति शर्मा, सृजन शर्मा ,सुधांशु शर्मा और पारथ शर्मा ने छबील का आयोजन किया  हमारे इलाके लड भडोल में यह पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लोग मीठे शरबत की छबीले लगाते हैं और सबको पिलाते हैं ।साथ में ही फल इत्यादि बांटे जाते हैं ।आज भी पूरे जोर शोर से लड भडोल मैं निर्जला एकादशी मनाई जा रही है।

 
LADBHAROLNEWS.COMसभी इलाका वासियों को इस पावन पर्व की बधाई देता है और छबील आयोजित करने वाले सज्जनों की सराहना करता है। यह पर्व आप सबके लिए मंगलमय हो। 
           

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