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विद्युत उपमंडल चढ़ियार में उपभोक्ताओं को बिजली के बिल ई-मेल एवं संदेश (एसएमएस) के माध्यम से होगें प्राप्त*

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लडभड़ोल (मिन्टु शर्मा) जिला कांगड़ा जयसिंहपुर / बैजनाथ, 30 जनवरी। विद्युत उपमंडल चढ़ियार के अंतर्गत आने वाले समस्त विद्युत उपभोक्ताओं को अब उनके बिजली के बिल ई-मेल एवं संदेश (एसएमएस) के माध्यम से प्रेषित किए जाएंगे। इसके तहत उपभोक्ताओं को बिजली बिल की हार्ड कॉपी उपलब्ध नहीं करवाई जाएगी। सहायक अभियंता विद्युत उपमंडल चढ़ियार ओम प्रकाश राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि यदि स्मार्ट मीटर के माध्यम से जारी किसी भी बिल में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है, तो उसका आवश्यक सुधार विद्युत उपमंडल चढ़ियार के कार्यालय में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बिल से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा समस्या के समाधान के लिए उपभोक्ता सीधे उपमंडल कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने ई-मेल एवं मोबाइल नंबर को अद्यतन रखें, ताकि समय पर बिल एवं संबंधित सूचनाएं प्राप्त हो सकें।

लड्ड भडोल क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा निर्जला एकादशी का पर्व। जगह-जगह लगाई जा रही छबीले।

लड्ड भडोल क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जा रहा निर्जला एकादशी का पर्व। जगह-जगह  लगाई जा रही छबीले।

  पाठकगण, हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान धडकता है । हर वर्ष 24 एकादशी होती है परंतु जब मल मास या अधिक मास आता है तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। जेठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत  में निर्जल रहकर उपवास किया जाता है। इसलिए इसे  निर्जला एकादशी कहते हैं।   
                                             

 हिंदू धर्म में इस पर्व का है महत्वपूर्ण  स्थान।

हिंदू धर्म इस पर्व का महत्वपूर्ण स्थान है ।जो लोग सभी एकादशी का उपवास नहीं रखते, अगर  केवल निर्जला एकादशी का व्रत रख ले तो उन्हें वर्ष भर की सभी एकादशी के व्रत का पुण्य लाभ मिलता है, ऐसी मान्यता है।                                   निर्जल रहकर किया जाता है व्रत। छबीले लगाकर लोगों को देते है  मीठा पानी और फल।                  इस दिन लोग निर्जल  रहकर उपवास रखते हैं। आज के दिन चावल या चावल से बनी चीजें नहीं खाई जाती। इस दिल तुलसी  दल या बिल पत्री को भी नहीं तोड़ते। कहा जाता है कि पांडव सभी एकादशी का उपवास किया करते थे ,परंतु महाबली  भीम अपने असहनीय भूख से विवश होकर उपवास नहीं कर पाते थे। तब महर्षि व्यास में जी ने उन्हें निर्जला एकादशी का एकमात्र उपवास करने को कहा था। तभी से इस एकादशी का नाम भीमसेनी और पांडव एकादशी भी पड़ा।   धूमधाम से मनाते हैं निर्जला एकादशी पर्व लड भडोल क्षेत्र के लोग ।

 आज लड भडोल में चंदन हिमाचली ,आदित्य उपाध्याय, आशीष शर्मा, शिवम ,प्रीति शर्मा, सृजन शर्मा ,सुधांशु शर्मा और पारथ शर्मा ने छबील का आयोजन किया  हमारे इलाके लड भडोल में यह पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लोग मीठे शरबत की छबीले लगाते हैं और सबको पिलाते हैं ।साथ में ही फल इत्यादि बांटे जाते हैं ।आज भी पूरे जोर शोर से लड भडोल मैं निर्जला एकादशी मनाई जा रही है।

 
LADBHAROLNEWS.COMसभी इलाका वासियों को इस पावन पर्व की बधाई देता है और छबील आयोजित करने वाले सज्जनों की सराहना करता है। यह पर्व आप सबके लिए मंगलमय हो। 
           

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