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लड़भड़ोल: 'विकसित भारत की संकल्पना' पर छात्रों ने उकेरी भविष्य के भारत की तस्वीर

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लडभड़ोल मिन्टु शर्मा  लड़भड़ोल स्थित भारतीय ज्ञान पीठ पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 'विकसित भारत की संकल्पना' विषय पर चित्रकला और निबंध लेखन प्रतियोगिता का शानदार आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि युवा पीढ़ी भविष्य के भारत की कैसी तस्वीर देखती है, वे देश में क्या सकारात्मक बदलाव चाहते हैं और किन मूल्यों को प्राथमिकता देते हैं। ​प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से अपने रचनात्मक विचारों को कैनवास पर उतारा। वहीं, निबंध लेखन में छात्रों ने 'अपने सपनों के भारत' का विस्तार से वर्णन किया। बच्चों ने लिखा कि भविष्य के भारत में शिक्षा प्रणाली कैसी होनी चाहिए, नागरिकों को किस तरह के अधिकार मिलने चाहिए और देश की आर्थिक तरक्की के लिए कौन-से नए उद्योग शुरू किए जाने चाहिए। सबसे प्रमुख रूप से, छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ देश को आगे रखकर काम करना चाहिए। ​ प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे: ​ चित्रकला प्रतियोगिता: प्रतीक्षा ने प्रथम, आदित्य ने द्वितीय और दक्षिल चौहान ने तृत...

लडभड़ोल अस्पताल खुद बीमार 3 में से 2 डॉक्टर गए, अब 9 से 4 बजे तक ही मिल रहा




लडभड़ोल तहसील क्षेत्र के डेढ दर्जन से अधिक पंचायत के हजारों लोगों को एकमात्र स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने वाला सिविल अस्पताल लडभड़ोल खुद बीमार नज़र आ रहा हैं।  आलम यह है कि इस क्षेत्र के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधा देने वाला सिविल अस्पताल  मात्र एक डॉक्टर के सहारे चला हुआ हैं। आपको बता दें की छुट्टी वाले दिन यहां पर सिर्फ स्टाफ नर्स की अपनी सेवाएं देते हुए उपस्थिति रहती हैं जबकि यहां डॉक्टर कोई भी उपस्थित नहीं रहता हैं। इस इलाके के लोगों की स्वास्थ्य सुविधा राम भरोसे पर ही चल रही हैं। बता दे कि इससे पूर्व यहां तीन डॉक्टर अपने सेवाए दे रहे थे जो कि फोन कॉल अपनी सेवाएं दे रहे थे। जिनमें से दो डॉक्टर आप अपनी पढ़ाई के लिए यहां से जा चुके हैं। अब सवाल यह जनता में खड़ा हो गया है कि मात्र एक डॉक्टर यहां दिन में अपनी सेवाएं देगा या रात्रि में। क्षेत्र के लोगों के लिए समस्या गंभीर है कि कितनी सरकार आई और कितनी गई और अपने फायदे के लिए इस अस्पताल का दर्जा तो बढ़ा दिया। लेकिन किसी भी सरकार ने यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के ऊपर ध्यान नहीं दिया। आलम यह है कि सिविल अस्पताल होने के बावजूद भी अल्ट्रा अल्ट्रासाउंड सुविधा और ना ही कोई लोगों को स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। न होने के साथ-साथ मूलभूत सुविधाएं भी लोगों को नहीं मिल पाती हैं। उपचार हेतु पहुंचे मरीजों में,पल्लवी, सोनिया सपना उर्मिला सुनील नीतू धर्मसिंह ने बताया कि आए स्वास्थ्य सुविधा पर उंगली उठाते हुए कहा कि इस अस्पताल में ज्यादातर सुविधा न होने से लोगों को इधर-उधर दूरराज के चिकित्सालय के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं। इस अस्पताल में जहां काम से कम चार वैज्ञानिक डॉक्टर सहित 8 से 10 डॉक्टर की नियुक्ति का प्रावधान है लेकिन प्रदेश की सरकार और विभाग की नाकामियों के चलते यहां पर कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है और लोगों को केवल एक ही शिक्षक दिन में सुबह 9:00 से 4:00 बजे तक अपने स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करते हैं। उसके बाद यहां कोई चिकित्सक तैनात नहीं होता हैं। अगर कोई आपातकालीन समय में कोई रोगी यहां पहुंचता भी है तो उनको सिर्फ स्टाफ नर्स के सारे ही अपना अपना उपचार करवाना पड़ता हैं।


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