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जोगिन्दरनगर में प्राकृतिक आपदा की घटना में महिला की मृत्यु !

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दिनांक 24 जुलाई, 2026 को जोगिन्दरनगर क्षेत्र में एक दुःखद प्राकृतिक घटना में सामेश्वरी शर्मा (49 वर्ष), निवासी सुल्तानपुर, जिला कुल्लू की मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह अपने परिवार के साथ माता सिमसा देवी मंदिर जा रही थीं। बाहमणू नाला के समीप वाहन रोकने के बाद वह पानी लेने के लिए नीचे गईं, तभी पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल जोगिन्दरनगर पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जोगिन्दरनगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण कर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह घटना प्राकृतिक आपदा के कारण होना पाई गई है तथा मामले में धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।

आपदा जोखिम कम करने को भडयाड़ा पंचायत में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू डीडीएमए मंडी के सौजन्य से चार ग्राम पंचायतों के 60 स्वयं सेवक आपदा जोखिम बारे होंगे प्रशिक्षित

 


जोगिन्दर नगर, 25 मार्च: आपदा जोखिम कम करने व आपदा जोखिम से निपटने के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) मंडी के सौजन्य से जोगिन्दर नगर उपमंडल की ग्राम पंचायत भडयाड़ा में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला में उपमंडल की ग्राम पंचायत भडयाड़ा, टिकरू, मैन भरोला तथा सैंथल-पड़ैन से आपदा प्रबंधन को टास्क फोर्स (यूथ वालंटियर) के लगभग 60 स्वयं सेवकों को आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

इस बारे जानकारी देते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) मंडी से प्रशिक्षक एवं जिला सर्व समन्वयक अमर जीत सिंह ने बताया कि इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ एसडीएम कार्यालय में कार्यालय कानूनगो मेघ सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान स्वयं सेवियों को आपदा प्रबंधन, भूकंप, भूस्खलन व अन्य आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और घटना स्थल पर फंसे लोगों के जीवन को सुरक्षित बचाने के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही बताया कि इस कार्यशाला में उपस्थित लोगों को भूस्खलन, बाढ़, स्नेक बाइट, सीपीआर, आगजनी की घटनाएं तथा सडक़ दुर्घटना में स्वयंसेवक किस प्रकार अपनी प्रतिक्रियाएं सुनिश्चित कर सकते हैं इत्यादि विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की जा रही है।

अमर जीत सिंह ने कहा कि किसी भी आपदा के जोखिम को कम करने के साथ-साथ इसके प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। इसके लिए जहां विभिन्न आपदाओं के प्रति व्यापक जन जागरूकता होना आवश्यक है तो वहीं जन सहभागिता का होना भी अति महत्वपूर्ण है। आपदा के समय लोगों की जन भागीदारी से न केवल आपदा से होने वाले प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है बल्कि किसी भी आपदा उपरांत राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में भी स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में आपदा पूर्व प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों से भाग लेने का आह्वान किया है।
उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में 26 से 28 मार्च को ग्राम पंचायत चौंतड़ा में ग्राम पंचायत आहजू, बदेहड़, चौंतड़ा, मटरू तथा सगनेहड़, 1 से 3 अप्रैल तक ग्राम पंचायत रोपा पधर में ग्राम पंचायत रोपा पधर, कधार, गुम्मा, हारगुनैण, 2 से 4 अप्रैल तक ग्राम पंचायत निचला  गरोडू में ग्राम पंचायत जिम्म जिमा, निचला गरोडू, जलपेहड़, दारट बगला तथा 3 से 5 अप्रैल तक ग्राम पंचायत मसौली में ग्राम पंचायत मसौली, नेर घरवासड़ा, बल्ह तथा चलारग के स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने इस दौरान ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों से अपनी उपस्थिति दर्ज करने का भी आह्वान किया है ताकि उन्हे विभिन्न आपदाओं को लेकर जानकारी प्रदान कर प्रशिक्षित किया जा सके।


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