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जोगिन्दरनगर में प्राकृतिक आपदा की घटना में महिला की मृत्यु !

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दिनांक 24 जुलाई, 2026 को जोगिन्दरनगर क्षेत्र में एक दुःखद प्राकृतिक घटना में सामेश्वरी शर्मा (49 वर्ष), निवासी सुल्तानपुर, जिला कुल्लू की मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार वह अपने परिवार के साथ माता सिमसा देवी मंदिर जा रही थीं। बाहमणू नाला के समीप वाहन रोकने के बाद वह पानी लेने के लिए नीचे गईं, तभी पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरने के कारण उनके सिर पर गंभीर चोट लगी। उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल जोगिन्दरनगर पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जोगिन्दरनगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण कर पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह घटना प्राकृतिक आपदा के कारण होना पाई गई है तथा मामले में धारा 194 बीएनएसएस के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।

गोरा व भ्रां गांवों में ड्रोन तकनीक से खाद स्प्रे बारे किसानों को दिया डैमो कृषि विभाग चौंतड़ा के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के वैज्ञानिकों ने किसानों को बताई ड्रोन तकनीक

 


जोगिन्दर नगर, 30 जनवरी : चौंतड़ा विकास खंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊटपुर के गांव भ्रां तथा ग्राम पंचायत दलेड के गांव गोरा में किसानों को ड्रोन तकनीक से खाद छिडक़ाव बारे प्रदर्शन (डैमो) प्रदान किया। कृषि विभाग चौंतड़ा के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती में कृषि की आधुनिक ड्रोन तकनीक के उपयोग की खाद छिडक़ाव कर प्रदर्शन (डैमो) के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रदान की।

इस बात की पुष्टि करते हुए विषयवाद विशेषज्ञ कृषि चौंतड़ा अरूण कुमार अबरोल ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश यादव और उनकी टीम ने चौंतड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत ऊटपुर के गांव भ्रां तथा ग्राम पंचायत दलेड़ के गांव गोरा में ड्रोन तकनीक के माध्यम से खाद छिडक़ाव बारे किसानों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने डैमो के माध्यम से ड्रोन तकनीक से खाद छिडक़ाव करने की विस्तृत जानकारी उपस्थित किसानों को प्रदान की। साथ ही किसानों को बताया कि इस ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक खेती में खाद सहित अन्य कीटनाशकों इत्यादि का छिडक़ाव किया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को बताया कि ड्रोन तकनीक से मात्र दस मिनट में ही लगभग तीन बीघा भूमि में खाद छिडक़ाव किया जा सकता है। इफको के माध्यम से इस ड्रोन तकनीक के प्रदर्शन का उद्देश्य भी किसानों को इस तकनीक की जानकारी उपलब्ध करवाना है ताकि इस तकनीक के प्रयोग से किसान कम समय में अधिक खेती में खाद का छिडक़ाव कर सकें।
एसएमएस अरूण कुमार अबरोल ने बताया कि भविष्य में ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण हासिल कर युवा इस क्षेत्र में भी स्वरोजगार के अवसर सृजित कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) शाहपुर में ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत खेती बाड़ी में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को लेकर लाइसेंस भी प्रदान किया जाएगा।



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