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लडभड़ोल बस स्टैंड में वाटर कूलर और पानी की टंकी की हुई सफाई, फिल्टर लगाने की उठी मांग

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आज लडभड़ोल बस स्टैंड में लंबे समय बाद वाटर कूलर और पानी की टंकी की अच्छी तरह सफाई की गई। कई दिनों से सफाई न होने के कारण टंकी और वाटर कूलर में काफी मिट्टी और गंदगी जमा हो गई थी, जिससे यात्रियों को स्वच्छ पेयजल मिलने में परेशानी हो रही थी। सफाई अभियान में शिवांग सोनी, अक्षय कुमार, राकेश कुमार, जसवंत (फौजी भाई) और आशीष कुमार ने मिलकर सराहनीय योगदान दिया। स्थानीय लोगों ने इन युवाओं की इस सामाजिक पहल की जमकर प्रशंसा की और इसे जनहित का कार्य बताया। साथ ही स्थानीय लोगों ने क्षेत्र के विधायक से आग्रह किया है कि बस स्टैंड पर लगे वाटर कूलर में जल्द से जल्द वॉटर फिल्टर लगाया जाए, ताकि यात्रियों और आम जनता को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आते हैं, इसलिए स्वच्छ पेयजल की बेहतर व्यवस्था प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

लड भड़ोल महाविद्यालय में हिन्दी दिवस पर काव्य पाठ, भाषण व प्रदर्शनी का आयोजन


राजकीय महाविद्यालय लड भड़ोल में ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस

मौके पर विद्यार्थियों के लिए भाषण तथा काव्य पाठ प्रतियोगिताओं के साथ-साथ महाविद्यालय के पुस्कालय

विभाग द्वारा हिन्दी विषय की महत्वपूर्ण पुस्तकों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत कार्यक्रम

के संयोजक प्रो. संजीव कुमार के संबोधन के साथ हुई। इस आयोजन में काव्य पाठ प्रतियोगिता के अंतर्गत दस

प्रतिभागियों ने दिल को छू लेने वाली प्रस्तुतियां दी। इसके तहत स्वाति, पल्लवी व अंशिका क्रमश: प्रथम,

द्वितीय व तृतीय स्थान पर रही। भाषण प्रतियोगिता में स्वाति, मुस्कान व कोमल ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय व

तृतीय स्थान प्राप्त किया। सभी प्रतिभागियों ने हिंदी दिवस के अवसर पर आत्मविश्वास के साथ प्रेरक विचारों

से भरपूर प्रस्तुतियां दी। विद्यार्थियों ने बताया कि हिन्दी भाषा सरल होने के साथ-साथ हमारी संस्कृति व

मूल्यों की भी पहचान है। इस आयोजन में महाविद्यालय के लगभग सभी विद्यार्थियों ने जबकि दोनों

प्रतियोगिताओं में कुल 1

5 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इस मौके पर महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वास्तव में

भाषा जीवन का आधार है। इस परिप्रेक्ष्य में हिंदी महज एक विषय नहीं है, बल्कि एक जीवन जीने की कला है।

ये हमारी संस्कृति की धरोहर को संजोए रखने तथा उसका विकास करने में सहायक रही है। उन्होंने बताया कि

आधुनिक तकनीकों के साथ हिन्दी भाषा ने जिस तरह तालमेल बिठाया है उसके कारण वैश्विक स्तर पर हिन्दी

का प्रयोग व स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम संयोजक सहित सभी विजेताओं,

विद्यार्थियों व स्टाफ सदस्यों को सहयोग व सफल आयोजन के लिए बधाई दी। 

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