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लड़भड़ोल महाविद्यालय में पीटीए कार्यकारिणी का गठन, शशि देवी बनीं प्रधान

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लड़भड़ोल। राजकीय महाविद्यालय लड़भड़ोल में कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. मुनीष ठाकुर की अध्यक्षता में आम सभा का आयोजन कर सर्वसम्मति से नई पीटीए कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें शशि देवी को प्रधान और रीता देवी को उप-प्रधान चुना गया। इसके अलावा संजीव कुमार को सचिव, सीता देवी को उप-सचिव, पूनम देवी को कोषाध्यक्ष तथा दीपा देवी तथा सुमेर सिंह को सदस्य मनोनीत किया गया। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. मुनीष ठाकुर ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कॉलेज के विकास में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया, वहीं नई प्रधान शशि देवी ने हर संभव सहयोग का भरोसा दिया।  

सुंड की नहीं हो सकती है खेती, किसान हों सावधान, नहीं मिलेगी मार्केट राष्ट्रीय औषध पादप बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय जोगिन्दर नगर ने जारी की एडवाइजरी


 जोगिन्दर नगर नगर, 22 मार्च-देखने में आया है कि आजकल कुछ किसान सौंठ की खेती करने का दावा कर रहे हैं। साथ ही प्रचार यह हो रहा है कि सौंठ का बीज कुछ सरकारी व गैर सरकारी अनुसंधान संस्थानों से मिल रहा है। लेकिन जब फसल तैयार हो रही है तो किसानों को कोई खरीदार नहीं मिल रहा। ऐसे धोखे का शिकार हो रहे किसान मार्केट न मिलने के अभाव में परेशान का सामना कर रहे हैं।

इस संबंध में आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान जोगिन्दर नगर स्थित आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषध पादप बोर्ड के क्षेत्रीय सुगमता केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अरुण चंदन द्वारा एक एडवाइजरी जारी करके किसानों को सावधान रहने का सुझाव दिया गया है। उनका कहना है कि असल में सौंठ तो अदरक को विशेष विधि से सुखाकर कर बनाया जाता है। सौंठ नाम का कोई पौधा नहीं होता है।
एडवाइजरी में कहा गया है कि किसान शटी नामक पौधे जिसे कपूर कचरी सौंठ के नाम भ्रमित हो रहे हैं। कपूर कचरी हिमाचल प्रदेश के जंगलों में भी पाई जाती है, लेकिन यह कतई सौंठ नहीं है। एडवाइजरी में कहा गया है किसान ऐसे किसी भी दावे से भ्रमित न हों और 18001205778 राष्ट्रीय हेल्पलाइन से जानकारी ले सकते हैं या क्षेत्रीय कार्यालय जोगिन्दर नगर से संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय औषध पादप बोर्ड को यह जानकारी जानकर भी आश्चर्य हुआ है कि शिमला व हिमाचल के कुछ शहरों में इस तथाकथित सौंठ को बड़े शौक से सलाद के रूप में भी परोसा जा रहा है। इस संबंध में राष्ट्रीय औषध पादप बोर्ड की स्थानीय विशेषज्ञ समिति जिसमें प्रो.डी.आर.नाग, डॉ.अरुण चंदन, डॉ.सौरभ शर्मा, डॉ. शीतल चंदेल एवं डॉ. पंकज पालसरा शामिल है ने कहा कि यदि कोई कहे कि वह गुड़ की खेती कर रहा है तो क्या यह संभव है। इसी तरह सौंठ भी अदरक का ही परिवर्तित रूप है। ऐसे में सौंठ की खेती संभव नहीं है जबकि अदरक की खेती की जा सकती है।
उन्होने उत्तर भारत के किसानों से इस तरह सौंठ की खेती के नाम पर भ्रमित न होने का आह्वान किया है। इस संबंध में किसी भी प्रकार की जानकारी वे सीधे राष्ट्रीय औषध पादप बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय जोगिन्दर नगर से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा वे राष्ट्रीय हेल्पलाइन नम्बर की भी मदद ले सकते हैं।



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