जी हां पाठकगण, यह वाक्या कल रात का है । कल रात को सांडा पत्तन के निवासी ज्योति प्रकाश की सपुत्री जसिका ठाकुर आयु 10 साल को रात 11:00 बजे इतनी तेज पेट दर्द हुई की उसे अस्पताल ले जाना पङा। ज्योति प्रकाश जब अपने पुत्री को लेकर रात 11:30 बजे CHC LADBHAROL पहुंचे तो वहां पर कोई भी डॉक्टर या चौकीदार मौजूद नहीं था। उन्होंने 20 मिनट तक इंतजार किया और आवाज लगाते रहे परंतु जब उन्हें किसी ने ने भी नहीं सुना तो वह तुरंत बैजनाथ के लिए निकल पड़े और बेटी का बैजनाथ के सरकारी हॉस्पिटल में इलाज करवाया।
लडभङोल :- डेढ़ दर्जन पंचायत के हजारों लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए है एकमात्र समुदाय स्वास्थ केंद्र परंतु नाम मात्र की चिकित्सा असुविधा और अधिकांश समय स्टाफ नदारद!
जी हां पाठक गण, इस बात से गुस्साए ज्योति प्रकाश यह बात पूछना चाहते हैं कि हमारी क्षेत्र में डेढ़ दर्जन पंचायते हैं और चिकित्सा सुविधा देने के लिए एकमात्र हॉस्पिटल है और वहां पर भी आपातकाल में चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती। यह हॉस्पिटल है या लोगों का काल? इस प्रश्न का ज्योति प्रकाश जवाब चाहते हैं। ज्योति प्रकाश का गुस्सा जायज़ भी है क्योंकि कितनी देर तक अपनी बेटी को दर्द से तड़पते देखते रहे और हमारे क्षेत्र के एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेटी का इलाज करवाने के लिए इधर उधर आवाजें लगाते रहे।
पहले भी कई बार रात को स्टाफ के नदारद रहने की खबरें आती रही हैं।
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लड़की के पिता ज्योति प्रकाश
LADBHAROLNEWS.COM इस घटना पर गहन रोष प्रकट करता है और प्रशासन से निवेदन करता है कि आपातकाल में भी लोगों को चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहनी चाहिए। अगर कल को किसी को कुछ हो जाता है तो उसके लिए कौन जिम्मेवार होगा?
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Koi Kuch nhi karegaa
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