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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भराड़पट में हुआ नई एसएमसी कमेटी का गठन! श्रीमती रेनू बनी प्रधान!

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लडभड़ोल ( मिन्टु शर्मा) आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भराड़पट में नई एसएमसी कमेटी का गठन किया गया जिसमें अभिभावकों और समस्त विद्यालय स्टाफ ने भाग लिया। श्रीमती रेनू को सर्वसम्मति से नई एसएमसी कमेटी का प्रधान चुना गया।इसके अतिरिक्त श्रीमती शिल्पादेवी, श्रीमती लता देवी, श्रीमती सीमा देवी, श्रीमती तारादेवी , श्रीमती ममता को नई कमेटी का मेंबर चुना गया।प्रधानाचार्य श्री राजेश चंद कटोच जी ने नव निर्वाचित एसएमसी कमेटी की प्रधान श्रीमती रेनू देवी को बधाई दी और साथ ही पूर्व एसएमसी कमेटी प्रधान श्रीमती बबली देवी को पिछले 3 वर्षों के दौरान अपना भरपूर सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। 

ढंडोल (कांगड़ा) गांव का भुणू मंदिर जहां ना जाने पर वहां की लड़कियों को नहीं होती संतान प्राप्ति

ढंडोल (कांगडा)गांव का भूणु मंन्दिर जहां ना जाने पर वहां की लड़कियों को नहीं होती संतान प्राप्ति।      

ढंडोल (कांगड़ा) गांव का भूणु मंन्दिर जहां ना जाने पर वहाँ की लड़कियों को नहीं होती संन्तान प्राप्ति ।

पाठकगण,आज हम आपके समक्ष की अनोखी घटना तथा मंदिर का जिकर करने जा रहे हैं जो  आपको 21वीं सदी में भी हैरान  परेशान कर देगा । कांगड़ा के चढियार क्षेत्र के साथ ढंडोल नामक है । जो कि लड भडोल के जमथला तथा लड भडोल से भी साफ दिखाई देता है । ये एक बहुत सुन्दर स्थान है । इसी गांव की पहाड़ी की चोटी पर स्थित है भूणू का मन्दिर ।                                              ढंडोल वासियों ने मार डाला था भूणु को ।           

जी हां,ये मंदिर किसी  देवता विशेषका नहीं  एक व्यक्ति भूण का सम्बन्ध लड भडोल के डिबडैऊँ के चौहान वंश से था ।लड भडोल तथा ढंडोल के बीच में बिनवा खडड् है जगह  पर पहले लोग पानी भरने नहाने  इत्यादि के  लिए जाया करते थे

   डिबडैऊ,जम थला तथा ढंडोल के मध्य है । वर्तमान में  इस  जगह पुल का निर्माण हो रह है  ।  इसी स्थान पर नहाने जाया करता था भूणू ।वहाँ पर ढंडोल की कुछ कन्याऐं भी नहाने आया करती थीं ।भूणू भी एक बालक ही था  उन में जान पहचान हो गई थी ।

एक दिन एक  आदमी  ने  अपनी कन्या को नींद  में  बड़ बड़ाते हुए  सुना कि भूणू आया , भूणू आया । वो हैरान हुआ और क्रोधित हो गया कि मेरी  लड़की   ऐसे क्यों बड बड़ा रही है ।कहीं  इसके  भूणू के साथ  अवैध सम्बन्ध तो नहीं  ।उसने यह बात ढंडोल के पुरूषों से कहीं  ओर निगरानी करने लगा कि कब भूणू नहाने  आता  है ।भूणू जैसे ही  नहाने  आया ।ढंडोल वालों ने  उसे ऊपर से पत्थर मारकर उसकी जान ले ली ।

भूणू के मंदिर का निर्माण

उस वक्त लडके लड़कियों का खुलापन आज जितना नहीं था । भूणू मासूम था ।उसका कोई कसूर नहीं था फिर भी  उसे शक के  आधार पर मार डाला गया ।कुछ दिन बाद ही   गांव के  लोगो को रोज अजीब अजीब सपने  आने  लगे  कि तुमने  निर्दोष भूणू  को मारा है ।अब तुम्हें उसका  मंदिर बनवाना होगा और पत्थर के भूणू के रुप में  उसे  पुजना होगा ।अगर तुम्हारी कन्याऐं 

वहाँ पर नहीं जाऐगी तो उनका वंश नहीं बढेगा ।पत्थर की होती है पूजा

फिर गांव के लोगों ने  आपस में विचार विमर्श किया  और पहाड़ की चोटी पर भूणू का मंदिर बनवाया  और एक पत्थर को भूणू के स्वरुप स्थापित किया । इसी पत्थर को भूणू के  रूप में पुजा जाता है ।

वहाँ की किसी कुल विशेष की लड़कियों को वहाँ शादी के बाद जाना होता  है नहीं तो वे मां नहीं बन पाती ।

पत्थर का करना पडता है पूजन 21वीं सदी  में यह हैरानी  से भर देने  वाली बात लगेगी पर यह सत्य है । कन्या विशेष को शादी  के बाद वहाँ जाना होता है ओर  उस भूणू रूपी पत्थर को पूजना होता है ।

ये जानकारी हमे आम जनमानस तथा पुराने बुजुर्गो से मिली है । हम इसे ओर लौगो के सदर्म्म में लाना चाहते है  ।हमारा उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ढेस पहुंचाना नहीं है ।वरना ये  संदेश देना है कि किसी के ऊपर गलत  इंलजाम नहीं लगाना चाहिए ।किसी निर्दोष के साथ गलत होगा तो कुदरत उसे किसी न किसी तरीके से दंडित जरूर करती है ।

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