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लडभड़ोल (चलोटी) के अभिषेक ठाकुर को एनसीसी योगदान के लिए राज्यपाल सम्मान, क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा

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लडभड़ोल( मिन्टु शर्मा) 8 फ़रवरी 2026 (वीर खड़का ) लडभड़ोल के छात्र अभिषेक ठाकुर को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए माननीय राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ल द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल अभिषेक ठाकुर बल्कि उनके परिवार, शिक्षण संस्थानों और पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। अभिषेक ठाकुर, श्री शिव कुमार एवं श्रीमती सरोज कुमारी के सुपुत्र हैं, जो लड भड़ोल के चलोटी गांव से संबंध रखते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारती विद्या पीठ, बैजनाथ से प्राप्त की तथा बारहवीं कक्षा की शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बैजनाथ से पूरी की। वर्तमान में वे पंडित संत राम डिग्री कॉलेज, बैजनाथ से बीसीए की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिषेक ठाकुर को प्राप्त यह सम्मान क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देता है कि समर्पण, मेहनत और अनुशासन से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। अभिषेक ठाकुर 5 एचपी बटालियन एनसीसी, धर्मशाला के कैडेट हैं, जो शिमला ग्रुप के अंतर्गत आत...

बाल विवाह करवाने पर विवाह सेवा प्रदाताओं को भी हो सकती है दो साल की सजा-मनीश चौधरी बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह रोकथाम व जागरूकता को लेकर बैठक आयोजित 18 वर्ष से कम आयु की लडक़ी और 21 वर्ष से कम आयु के लडक़े का विवाह कानूनन अमान्य


 जोगिन्दर नगर, 03 मई-एसडीएम जोगिन्दर नगर मनीश चौधरी ने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियिम, 2006 के तहत बाल विवाह करवाने पर विवाह सेवा प्रदाताओं जिसमें पंडित, केटरिंग का कार्य करने वाले, टैंट एव डीजे इत्यादि सेवा प्रदाता शामिल हैं को भी दो साल तक का कठोर कारावास या एक लाख रूपये तक का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं हो सकती हैं। एसडीएम आज बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह रोकथाम व जागरूकता को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत 18 वर्ष के कम आयु की लडक़ी और 21 वर्ष से कम आयु के लडक़े को नाबालिग माना जाता है और नाबालिगों द्वारा किया गया विवाह गम्भीर और गैर जमानती अपराध है। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत नाबालिगों के विवाह अमान्यकरणीय के लिए संबंधित पक्ष के लोग 2 वर्ष की अवधि के भीतर मामला जिला न्यायालय में दायर कर सकते हैं। साथ ही विवाह अमान्य होने पर विवाह के समय दूसरे पक्ष की ओर से प्राप्त उपहारों, गहनों व धनराशि इत्यादि को भी वापिस करना होता है।
मनीश चौधरी ने कहा कि जो कोई व्यक्ति बाल विवाह को बढ़ावा देता है या फिर इसका प्रचार करता है, तो ऐसा व्यक्ति भी बाल विवाह अधिनियम के तहत सजा का हकदार है। जिसके तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास या एक लाख रूपये का जुर्माना या फिर दोनों सजाएं हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं पर भी बाल विवाह से जुड़ा कोई भी मामला लोगों के ध्यान में आता है तो वे इस संबंध में उनके कार्यालय, सीडीपीओ के कार्यालय या फिर संबंधित क्षेत्र की पुलिस को सूचना उपलब्ध करवा सकते हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस विभाग को ग्रामीण स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला मण्डलों एवं पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से समाज के सभी लोगों को बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के सभी प्रावधानों की जानकारी उपलब्ध करवाने तथा इस संबंध में लोगों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए।
बैठक का संचालन गठित समिति के सदस्य सचिव एवं सीडीपीओ चौंतड़ा बालक राम वर्मा ने किया।
बैठक में सीडीपीओ बीआर वर्मा के अतिरिक्त बीईईओ चौंतड़ा राजू राम, बीईईओ लडभड़ोल कांता देवी, एएसआई राम चंद, पंडित राकेश कुमार सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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